आदि पर्व  अध्याय १५०

कुन्त्यु उवाच

एवं स भगवान्व्यासः पुरा कौरवनन्दन |  २५   क
प्रोवाच सुतरां प्राज्ञस्तस्मादेतच्चिकीर्षितम् ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति