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शान्ति पर्व
अध्याय १५०
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नारद उवाच
यद्धि किञ्चिदिह प्राणि शल्मले चेष्टते भुवि |  २९   क
सर्वत्र भगवान्वाय़ुश्चेष्टाप्राणकरः प्रभुः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति