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शान्ति पर्व
अध्याय १५०
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भीष्म उवाच
तत्र स्म मत्ता मातङ्गा धर्मार्ताः श्रमकर्शिताः |  ३   क
विश्रमन्ति महावाहो तथान्या मृगजातय़ः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति