menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १४७
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
प्रणिपत्य च कौन्तेय़ः प्राञ्जलिर्वाक्यमव्रवीत् |  २१   क
प्रसीद कपिशार्दूल दुरुक्तं क्षम्यतां मम ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति