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विराट पर्व
अध्याय ५०
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अर्जुन उवाच
य एष तु रथानीके सुवर्णकवचावृतः |  ११   क
सेनाग्र्येण तृतीय़ेन व्यवहार्येण तिष्ठति ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति