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वन पर्व
अध्याय १५०
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वैशम्पाय़न उवाच
सनाथाः पाण्डवाः सर्वे त्वय़ा नाथेन वीर्यवन् |  १२   क
तवैव तेजसा सर्वान्विजेष्यामो वय़ं रिपून् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति