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वन पर्व
अध्याय १५०
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वैशम्पाय़न उवाच
हरिणैश्चञ्चलापाङ्गैर्हरिणीसहितैर्वने |  २०   क
सशष्पकवलैः श्रीमान्पथि दृष्टो द्रुतं यय़ौ ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति