वन पर्व  अध्याय १५०

वैशम्पाय़न उवाच

कृतपद्माञ्जलिपुटा मत्तषट्पदसेविताः |  २३   क
प्रिय़तीर्थवना मार्गे पद्मिनीः समतिक्रमन् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति