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कर्ण पर्व
अध्याय ६
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सञ्जय़ उवाच
ते वय़ं प्रवरं नॄणां सर्वैर्गुणगणैर्युतम् |  १५   क
कर्णं सेनापतिं कृत्वा प्रमथिष्यामहे रिपून् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति