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वन पर्व
अध्याय ३३
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द्रौपद्यु उवाच
कुर्वतो हि भवत्येव प्राय़ेणेह युधिष्ठिर |  ३७   क
एकान्तफलसिद्धिं तु न विन्दत्यलसः क्वचित् ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति