menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
राक्षसोऽस्य विरूपाक्षः सूतो दीप्तास्यकुण्डलः |  १४   क
रश्मिभिः सूर्यरश्म्याभैः सञ्जग्राह हय़ान्रणे |  १४   ख
स तेन सहितस्तस्थावरुणेन यथा रविः ||  १४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति