menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
व्यदृश्यत महावाहुर्मैनाक इव पर्वतः |  ५९   क
अङ्गुष्ठमात्रो भूत्वा च पुनरेव स राक्षसः |  ५९   ख
सागरोर्मिरिवोद्धूतस्तिर्यगूर्ध्वमवर्तत ||  ५९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति