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द्रोण पर्व
अध्याय १५०
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सञ्जय़ उवाच
अशक्यं कर्तुमन्येन सर्वभूतेषु मानद |  ९५   क
यदकार्षीत्तदा कर्णः सङ्ग्रामे भीमदर्शने ||  ९५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति