आदि पर्व  अध्याय १५१

वैशम्पाय़न उवाच

स कृष्यमाणो भीमेन कर्षमाणश्च पाण्डवम् |  १९   क
समय़ुज्यत तीव्रेण श्रमेण पुरुषादकः ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति