आदि पर्व  अध्याय १५१

वैशम्पाय़न उवाच

ततोऽस्य जानुना पृष्ठमवपीड्य वलादिव |  २२   क
वाहुना परिजग्राह दक्षिणेन शिरोधराम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति