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आदि पर्व
अध्याय १५१
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः स राक्षसः श्रुत्वा भीमसेनस्य तद्वचः |  ३   क
आजगाम सुसङ्क्रुद्धो यत्र भीमो व्यवस्थितः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति