शान्ति पर्व  अध्याय १५१

भीष्म उवाच

हतास्ताश्चैव भग्नाश्च पाण्डवेन यशस्विना |  ३३   क
चरता वलमास्थाय़ पाकशासनिना मृधे ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति