menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २५५
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
स प्रविश्याश्रमपदं व्यपविद्धवृसीघटम् |  ४८   क
मार्कण्डेय़ादिभिर्विप्रैरनुकीर्णं ददर्श ह ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति