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द्रोण पर्व
अध्याय १६०
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सञ्जय़ उवाच
अहं च तात कर्णश्च भ्राता दुःशासनश्च मे |  ३३   क
पाण्डुपुत्रान्हनिष्यामः सहिताः समरे त्रय़ः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति