भीष्म पर्व  अध्याय ९३

सञ्जय़ उवाच

अनुजानीहि समरे कर्णमाहवशोभिनम् |  ४०   क
स जेष्यति रणे पार्थान्ससुहृद्गणवान्धवान् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति