अनुशासन पर्व  अध्याय १५१

भीष्म उवाच

मा विघ्नं मा च मे पापं मा च मे परिपन्थिनः |  ५१   क
ध्रुवो जय़ो मे नित्यं स्यात्परत्र च परा गतिः ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति