वन पर्व  अध्याय १५१

वैशम्पाय़न उवाच

मुनिवेषधरश्चासि चीरवासाश्च लक्ष्यसे |  १५   क
यदर्थमसि सम्प्राप्तस्तदाचक्ष्व महाद्युते ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति