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उद्योग पर्व
अध्याय १५१
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वैशम्पाय़न उवाच
अस्मिन्नभ्यागते काले किं च नः क्षममच्युत |  २   क
कथं च वर्तमाना वै स्वधर्मान्न च्यवेमहि ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति