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द्रोण पर्व
अध्याय १५१
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सञ्जय़ उवाच
ते चापि सर्वे प्रवरा नरेन्द्रा; महावला वर्मिणश्चर्मिणश्च |  २१   क
हर्षान्विता युय़ुधुस्तत्र राज; न्समन्ततः पाण्डवय़ोधवीराः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति