सभा पर्व  अध्याय ३३

वैशम्पाय़न उवाच

प्रतिजग्राह तत्कृष्णः शास्त्रदृष्टेन कर्मणा |  ३१   क
शिशुपालस्तु तां पूजां वासुदेवे न चक्षमे ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति