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शान्ति पर्व
अध्याय १५२
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भीष्म उवाच
सुखप्रिय़ैस्तान्सुमहाप्रतापा; न्यत्तोऽप्रमत्तश्च समर्थय़ेथाः |  ३२   क
दैवात्सर्वे गुणवन्तो भवन्ति; शुभाशुभा वाक्प्रलापा यथैव ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति