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शल्य पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
न हि पश्यामि तं लोके गदाहस्तं नरोत्तमम् |  ११   क
युध्येद्दुर्योधनं सङ्ख्ये कृतित्वाद्धि विशेषय़ेत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति