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अनुशासन पर्व
अध्याय १५२
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वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य गान्धारीं च पतिव्रताम् |  १२   क
सह तैरृषिभिः सर्वैर्भ्रातृभिः केशवेन च ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति