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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
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व्रह्मो उवाच
वाय़व्यस्तु तथा स्पर्शस्त्वचा प्रज्ञाय़ते च सः |  ३०   क
त्वक्स्थश्चैव तथा वाय़ुः स्पर्शज्ञाने विधीय़ते ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति