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कर्ण पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
तत्र भारत भीमस्य वलं दृष्ट्वातिमानुषम् |  २८   क
व्यत्रस्यन्त रणे योधाः कालस्येव युगक्षय़े ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति