उद्योग पर्व  अध्याय १५२

वैशम्पाय़न उवाच

वाहिनी पृतना सेना ध्वजिनी सादिनी चमूः |  २२   क
अक्षौहिणीति पर्याय़ैर्निरुक्ताथ वरूथिनी |  २२   ख
एवं व्यूढान्यनीकानि कौरवेय़ेण धीमता ||  २२   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति