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द्रोण पर्व
अध्याय १०१
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सञ्जय़ उवाच
तस्य तल्लाघवं दृष्ट्वा प्रहसन्द्विजसत्तमः |  ९   क
प्रेषय़ामास विशिखानष्टौ संनतपर्वणः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति