वन पर्व  अध्याय १९

वासुदेव उवाच

स निवर्त रथेनाशु पुनर्दारुकनन्दन |  ३०   क
न चैतदेवं कर्तव्यमथापत्सु कथञ्चन ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति