शान्ति पर्व  अध्याय १५३

भीष्म उवाच

प्रत्यक्षं तु कुरुश्रेष्ठ त्यज लोभमिहात्मना |  १४   क
त्यक्त्वा लोभं सुखं लोके प्रेत्य चानुचरिष्यसि ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति