अनुशासन पर्व  अध्याय १५३

वैशम्पाय़न उवाच

राजन्विदितधर्मोऽसि सुनिर्णीतार्थसंशय़ः |  ३०   क
वहुश्रुता हि ते विप्रा वहवः पर्युपासिताः ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति