अनुशासन पर्व  अध्याय १५३

वैशम्पाय़न उवाच

तव पुत्रा दुरात्मानः क्रोधलोभपराय़णाः |  ३५   क
ईर्ष्याभिभूता दुर्वृत्तास्तान्न शोचितुमर्हसि ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति