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अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
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वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवेन तीर्थेन पुत्र संशाम्य पाण्डवैः |  ४०   क
सन्धानस्य परः कालस्तवेति च पुनः पुनः ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति