आदि पर्व  अध्याय ३७

सूत उवाच

तमव्रवीत्पिता व्रह्मंस्तथा कोपसमन्वितम् |  २०   क
न मे प्रिय़ं कृतं तात नैष धर्मस्तपस्विनाम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति