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शान्ति पर्व
अध्याय ९९
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अम्वरीष उवाच
कानि यज्ञे हवींष्यत्र किमाज्यं का च दक्षिणा |  १४   क
ऋत्विजश्चात्र के प्रोक्तास्तन्मे व्रूहि शतक्रतो ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति