वन पर्व  अध्याय १५३

वैशम्पाय़न उवाच

इमे ह्यकस्मादुत्पाता महासमरदर्शिनः |  ११   क
दर्शय़न्तो भय़ं तीव्रं प्रादुर्भूताः समन्ततः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति