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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
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अर्जुन उवाच
विदितं ते महावाहो यथा दीक्षां चराम्यहम् |  ३०   क
न स तावत्प्रवेक्ष्यामि पुरं ते पृथुलोचन ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति