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द्रोण पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
धर्मादपेता ये चान्ये मय़ा नात्रानुकीर्तिताः |  ३६   क
ये चानुकीर्तिताः क्षिप्रं तेषां गतिमवाप्नुय़ाम् |  ३६   ख
यदि व्युष्टामिमां रात्रिं श्वो न हन्यां जय़द्रथम् ||  ३६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति