शान्ति पर्व  अध्याय ७९

भीष्म उवाच

अति स्विष्टस्वधीतानां लोकानति तपस्विनाम् |  २८   क
अनाशकाग्न्योर्विशतां शूरा यान्ति परां गतिम् |  २८   ख
एवमेवात्मनस्त्यागान्नान्यं धर्मं विदुर्जनाः ||  २८   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति