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द्रोण पर्व
अध्याय १५३
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सञ्जय़ उवाच
तावन्योन्यमभिद्रुत्य केशेषु सुमहावलौ |  २९   क
भुजाभ्यां पर्यगृह्णीतां महाकाय़ौ महावलौ ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति