menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय १७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ततः स शुशुभे राजन्कण्ठासक्तमहाधनुः |  ९२   क
परिवेषमनुप्राप्तो यथा स्याद्व्योम्नि चन्द्रमाः |  ९२   ख
यथैव च सितो मेघः शक्रचापेन शोभितः ||  ९२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति