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शान्ति पर्व
अध्याय १५४
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भीष्म उवाच
अनिन्दितो ह्यकामात्माथाल्पेच्छोऽथानसूय़कः |  १९   क
समुद्रकल्पः स नरो न कदाचन पूर्यते ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति