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शान्ति पर्व
अध्याय १५४
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भीष्म उवाच
हन्त ते कथय़िष्यामि येन श्रेय़ः प्रपत्स्यसे |  ५   क
पीत्वामृतमिव प्राज्ञो ज्ञानतृप्तो भविष्यसि ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति