अनुशासन पर्व  अध्याय १५४

वैशम्पाय़न उवाच

ततो भागीरथी देवी तनय़स्योदके कृते |  १८   क
उत्थाय़ सलिलात्तस्माद्रुदती शोकलालसा ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति