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वन पर्व
अध्याय १५४
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वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणो मन्त्रकुशलः सर्वास्त्रेष्वस्त्रवित्तमः |  ३   क
इति व्रुवन्पाण्डवेय़ान्पर्युपास्ते स्म नित्यदा ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति