menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अन्तर्हितं राक्षसं तं विदित्वा; सम्प्राक्रोशन्कुरवः सर्व एव |  २१   क
कथं नाय़ं राक्षसः कूटय़ोधी; हन्यात्कर्णं समरेऽदृश्यमानः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति